आजकल टीवी पर आइडिया की इन्टरनेट की सुविधा के बारे में विज्ञापन चल रहे हैं । इन विज्ञापनों में भारत के विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं, युवाओं, तथा अन्य लोगों को जो अनुचित प्रथाओं और रिवाजों के चलते शिक्षा लेने के अधिकार से वंचित रहते हैं, उन्हें कैसे आइडिया इन्टरनेट के माध्यम से शिक्षा पाना संभव है यह दिखाया जा रहा है। विज्ञापन कर्ताओं की कल्पना की दाद देनी होगी, उन्होंने इन अनुचित प्रथाओं तथा रिवाजों का उपयोग अपने विज्ञापनों में बहुत ही अच्छे तरीके से किया है।
विज्ञापन के माध्यम से पहले भी समाज में व्याप्त बुराइयों पर कटाक्ष करने का सफल प्रयास किया जा चुका है, सवाल यह है की क्या हमारे समाज के समक्ष आने वाली इन बुराइयों को दूर करने के प्रयास हम करने वाले हैं या नहीं? आज जब इन्टरनेट और स्मार्टफोन जैसी तकनीकों की वजह से सामाजिक अभिसरण बढा है, हम सबकी यह जिम्मेदारी बनती है कि समाज के उस तबके तक शिक्षा जैसे मौलिक अधिकारों को लेकर जाए।

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